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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 52

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

यश्चित्तफणिकूत्कारः सैवेयं कलनोच्यते । चिदेवाहमिति ज्ञात्वा सा चित्तामेव गच्छति ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

स्पन्दशक्ति के ही विलास चित्त और चित्तवृत्तियाँ हैं, ऐसा कहते हैं। जो चित्तरूपी साँप का फुफकारना है, वही यह कलना शब्द से कहा जाता हे मैं चित्‌ ही हूँ, ऐसा जानकर वह कलना शुद्ध चिद्रूपता को प्राप्त होती है