Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
जनकेन परित्यक्ता यथाहंकारवासना ।
तथा त्वमपि सद्बुद्धे विचार्यान्तः परित्यज ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
देह में अहंभाव का त्याग ही पूर्ण आत्मदर्शन में मुख्य साधन है, ऐसा कहते है।
यह देह ही मैं हूँ, इस रात्रि का विनाश होने पर अपने-आप सर्वव्यापक विशाल आत्मप्रकाश प्रकट
होता है। "यह देह ही मैं हूँ” इस परिच्छेद के विनष्ट होने पर अनन्तभुवनव्यापी विस्तार उत्पन्न हो जाता
है ॥१४.१५॥ हे सद्बुद्धे, जेसे राजा जनक ने विचार कर अहंकारवासना का त्याग किया वैसे आप भी
अपने हृदय में विचार कर अहंकारवासना का त्याग कीजिए