Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अहंकाराम्बुदे क्षीणे चिद्व्योम्नि विमले तते ।
नूनं संप्रौढतामेति स्वालोको भास्करः परः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकाररूपी मेघ के नष्ट होने पर
सर्वव्यापक, निर्मल चिदाकाश में आत्मप्रकाशरूपी परम सूर्य अवश्य ही अत्यन्त प्रकाश को प्राप्त होता
है