Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
शास्त्रसज्जनससर्गैः प्रज्ञां पूर्वं विवर्धयेत् ।
सेकसंरक्षणारम्भैः फलप्राप्तौ लतामिव ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई कहे कि प्रज्ञा जब ऐसी वस्तु है, तब उसे किस उपाय से प्राप्त करना चाहिये ? इस पर कहते हैं ।
जैसे फल प्राप्ति के लिए सिंचन, रक्षण करने आदि से लता बढ़ाई जाती है वैसे ही शास्त्राभ्यास
और सज्जनों की संगति से पहले प्रज्ञा को बढ़ाना चाहिये