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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

प्रज्ञावानसहायोऽपि कार्यान्तमधिगच्छति । दुष्प्रज्ञः कार्यमासाद्य प्रधानमपि नश्यति ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

लोक में भी प्रज्ञावान मन्त्री आदि की अन्यबल से युक्त पुरुष की अपेक्षा प्रबलता प्रसिद्ध ही है, ऐसा कहते हैं। प्रज्ञावान पुरुष चाहे सहायशून्य ही क्‍यों न हो, फिर भी वह कार्य में सफलता प्राप्त करता है, किन्तु प्रज्ञाविहीन पुरुष कार्य को प्राप्त कर बहुत सी सेना आदि के बल से प्रधान होकर भी नष्ट हो जाता है (७४)