Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
भोगैकचिन्तया सार्धं सममुत्क्रान्तचेतनः ।
प्राप्य मद्रेशपुत्रत्वमासीन्मद्रमहीपतिः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र भोगों की चिन्ता के साथ उसके प्राणपखेरू उड़े
थे, अतएव वह मद्रदेशाधिपति का लडका बनकर समय आने पर मद्रदेश का शासक बना