Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
धर्मचिन्तापरिभ्रंशात्पुत्रार्थं भोगचिन्तया ।
क्षीणायुषं तमहरन्मृत्युः सर्प इवानिलम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे इस पुत्र के धन हो, बड़े उत्तम गुण हों, बड़ी आयु हो
इस प्रकार सदा बनी रहनेवाली चिन्ताओं से उसने ध्यान आदि की निष्ठा का परित्याग कर दिया ॥ २ ३॥
पुत्र के लिए भोगों की चिन्ता से धर्म के चिन्तन से विमुख होने के कारण क्षीणायु हुए उसको मृत्यु ने ऐसे
ग्रसा जैसे कि साँप वायु को ग्रसता है