Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verses 22–23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, verses 22–23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
तत्र तस्य समुत्पन्नो मृग्याः पुत्रो नराकृतिः ।
तत्स्नेहेन परं मोहं पुनरप्याययौ क्षणात् ॥ २२ ॥
पुत्रस्यास्य धनं मेऽस्तु गुणाश्चायुश्च शाश्वतम् ।
इत्यनारतचिन्ताभिर्जहौ सत्यामवस्थितिम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर
उसका शापवश मृगी बनी हुई उस अप्सरा से नराकार पुत्र उत्पन्न हुआ | पुत्र के स्नेह से वह फिर भी
तुरन्त अत्यन्त मोह को प्राप्त हो गया