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Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 60

उनसठवाँ सर्ग समाप्त साठवाँ सर्ग ब्रह्मा से उत्पन्न हुए जीवों के देह ग्रहण के क्रम का और प्रधानरूप से ज्ञान के भाजन सात्विक जीवों के देह ग्रहण के क्रम का वर्णन |

19 verse-groups

  1. Verses 1–4पूर्वोक्त तीन अनीकसृष्टियों का- “सा व्योमानिलमाश्रित्य' इत्यादि से संक्षेप से कहे गये क्र…
  2. Verse 5हे श्रीरामचन्द्रजी, अनादि अनन्त ब्रह्मरूपी पद से उत्पन्न हुए यानी कल्पना को प्राप्त हुए य…
  3. Verse 6जैसे प्रकाश की शोभा मेघ में प्रविष्ट होती है वैसे ही ये जीवसमूह भूताकाश में प्रवेश करते ह…
  4. Verse 7तदनन्तर तेज, जल और पृथ्वी की उत्पत्ति हो जाने पर प्रकाश को प्राप्त करके वे जीव शब्द, स्पर…
  5. Verse 8इस प्रकार लिंगदेहता को प्राप्त हुए वे जीव प्राण के आत्मभाव के और भूततन्मात्रसहित वायु के…
  6. Verse 9तदनन्तर जगत में पैदा होते हैं और अनभिव्यक्त ज्ञानैश्वर्यवाले प्राणी होते हैं। तीसरे दल की…
  7. Verse 10चन्द्रकलास्वरूपता को प्राप्त हुए वे भी जीवसमूह कल्पवृक्ष के फलों में रसरूप से प्रवेश द्वा…
  8. Verse 11तदनन्तर उन चन्द्रकिरणों के नन्दन आदि वन में गिरने पर किरणों के साथ गिर रही वह जीवपरम्परा…
  9. Verse 12उस वन में फल चन्द्रमा की और सूर्य की किरणों के लगने से अपने रस से क्रमश: वृद्धि ओर मधुरता…
  10. Verse 13इस प्रकार पूर्वोक्त जीवपरम्परा चन्द्रमा की किरणों से गिर कर जैसे बालक दूध से भरे हुए माता…
  11. Verse 14वे फलों की पंक्ति सूर्य की किरणों से पक जायेंगी। कश्यप आदि से उपभुक्त उन्हीं फलों में वीर…
  12. Verses 15–16जैसे अंकुर, शाखा, पत्ते जिसमें आविर्भूत नहीं हुए, ऐसा वट वृक्ष का बीज, शाखा, अंकुर, पत्ते…
  13. Verse 17इस प्रकार गर्भ में प्राप्त हुए जीवों के जन्म में निमित्तमेद होने से विशेषता दशरतिं है । प…
  14. Verses 18–20जैसे मुक्त होता है, वैसा इस समय मैं आपसे कहूँगा । हे पुण्याकृतिवाले श्रीरामचन्द्रजी, प्रथ…
  15. Verse 21तब कौन उत्पन्न होते हैं ? ऐसा प्रश्न होने पर उन्हे कहते है । हे श्रीरामचन्द्रजी, राजस-साप…
  16. Verse 22अतएव वे दुर्लभ हैं, ऐसा कहते हैं। जो जब परमात्मा से नर और सुर के अनीक की अपेक्षा प्रधानता…
  17. Verse 23जो प्रजापति, सुर, और मनुष्य के अनीक से अन्य राक्षस, पिशाच, पशु-पक्षी आदि हैं वे पेड, पत्थ…
  18. Verse 24तत्त्वज्ञान की दुर्लभता का ही उपपादन करते हैं। क्रम से प्राप्त उत्तम जन्म में भी कुछ ही न…
  19. Verse 25मेरे सदृश आप भी वैराग्य, शम, दम आदि सम्पत्ति से पूर्ण हँ ही, किन्तु परमात्मपद का विचार न…