Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
स्थितस्य ते महापदाविचार्ययैवमायता ।
विचारय त्वमञ्जसा तदद्य चेह न द्वयम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे सदृश आप भी वैराग्य, शम,
दम आदि सम्पत्ति से पूर्ण हँ ही, किन्तु परमात्मपद का विचार न करने से आपकी इस प्रकार की संसार
भ्रान्तिरूप महाआपत्ति विस्तीर्णं हुई है । परमात्मपद का यहाँ पर मेरे सामने आज ही आप शीघ्र विचार
कीजिये | एकमात्र विचार करने से आप ही यहाँ पर अद्वितीय परम पद है