Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verses 18–20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, verses 18–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 18-20
संस्कृत श्लोक
तेनैव मोक्षभागी चेज्जन्मना स तु सात्त्विकः ।
अथैतां योनिमासाद्य कृत्यां जन्मपरम्पराम् ॥ १८ ॥
रक्षार्थं प्राप्तजन्मा चेत्तमोराजससात्त्विकः ।
पाश्चात्यजन्मना पुंसो राम वक्ष्यामि चाधुना ॥ १९ ॥
प्राधान्येन यथाऽऽयातः संसारमिति सात्त्विकः ।
स कदाचिन्न कश्चिच्च संभवत्यनघाकृते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मुक्त होता है, वैसा इस समय मैं आपसे कहूँगा । हे पुण्याकृतिवाले श्रीरामचन्द्रजी, प्रथम दल
में यानी विध्यनीक में उत्पन्न हुआ पुरुष कोई भी ओर कभी भी पुनः उत्पन्न नहीं होता है यानी मुक्त
ही हो जाता है