Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
भूतप्राणानिलं तेन गन्धवाहेन तेन च ।
निविशन्ति शरीरेषु जीवा गच्छन्ति वीर्यताम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार लिंगदेहता को प्राप्त हुए वे जीव प्राण के आत्मभाव के और भूततन्मात्रसहित
वायु के साथ अन्न और जल के द्वारा अंडज आदि चार प्रकार के प्राणियों के प्राणवायु यानी अन्नग्रासक
अपानवृत्ति भेद को प्राप्त करके शरीरों में प्रवेश करते हैं और वीर्यता को प्राप्त होते हैं