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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

तस्यामवस्थितं चित्तं न भूयो जन्मभाक्मनाक् । अथवा सर्वकर्तृत्वमकर्तृत्वं च राघव ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त समता में स्थित हुआ चित्त फिर तनिक भी जन्म भागी नहीं होता। अथवा हे श्रीरामचन्द्रजी, आत्मा की सर्वकर्तृता, अकर्तृता इन सबका त्याग करके मन का विलयकर जो आप अवशिष्ट रहें, वही आपका यथार्थस्वरूप हे । आप स्थिर होइये