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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

संकल्पनाशयत्नेन न भयान्यनुगच्छति । भावनाभावमात्रेण संकल्पः क्षीयते स्वयम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

संकल्प के क्षय से सब भयो का नाश हो जाता है और पूर्वभावों की भावना न करने से संकल्प का नाश हो जाता है, यह क्रम सिद्ध है, ऐसा कहते हैं। संकल्प के विनाश में यत्न करने से मनुष्य विविध भयों को प्राप्त नहीं होता । एकमात्र भावना के अभाव से संकल्प अपने आप क्षीण हो जाता है