Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
मा संकल्पय संकल्पं भावं भावय मा स्थितौ ।
एतावतैव भावेन भव्यो भवति भूतये ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
तब इस भ्रम की निवृत्ति के लिए कौन-सा उपाय है, ऐसा प्रश्न होने पर भ्रमनिवृत्ति का उपाय
कहते हैं ।
संकल्प का संकल्प मत करो, पहले अनुभूत सुख-दुःखादि भाव का वर्तमान स्थिति में स्मरण मत
करो । पूर्वभाव का स्मरण करने पर उनके ग्रहण और त्याग के लिए संकल्प का उदय होगा ही । केवल
वर्तमान स्थिति में पूर्वानुभूत सुख-दुःखादि भावों की अस्मरणरूपी भावना से ही भव्य पुरुष भूति के
लिए उन्मुख होता है