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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

सुमनःपल्लवामर्दे किंचिद्व्यतिकरो भवेत् । सुसाध्यो भावमात्रेण नतु संकल्पनाशने ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

यह उपाय अत्यन्त सरल है, यों उसकी प्रशंसा करते हैं। शिरीष आदि फूलों को और कोमल पल्लवो को मसलने में थोड़ा बहुत प्रयत्न हो सकता है, किन्तु भावना न करने मात्र से सिद्ध होनेवाले संकल्पनाश में उसकी भी संभावना नहीं है