Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
तेन दुःखाय महते किं मृतेन तवानघ ।
यददुःखाय तत्प्राज्ञाः संश्रयन्तीह नेतरत् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप, नाना योनियों में जन्म के लिए दुःखार्थं पुनः पुनः उस मरण
से तुम्हें क्या लाभ है, जो दुःख के लिए नहीं होता, विद्वान लोग उसी का आश्रय ले लेते हैं, अन्य
का नहीं लेते हैं