Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
अधिगतपरमार्थतामुपेत्य प्रसभमपास्य विकल्पजालमुच्चैः ।
अधिगमय पदं तदद्वितीयं विततसुखाय सुषुप्तचित्तवृत्तिः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
तो मुझे क्या करना चाहिए, यदि ऐसा पुत्र की ओर से प्रश्न हो, तो उस पर कहते हैँ ।
सुषुप्त चित्तवृत्तिवाले होकर तत्त्वज्ञता को प्राप्त करके मूलोच्छेदपूर्वक सम्पूर्णं विकल्पों को दूर कर
जो अद्वितीय मोक्ष नामक पद हे, उसे निरतिशय आनन्द की प्राप्ति के लिए प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करो