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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verses 15–16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verses 15–16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 15,16

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्नेव जगत्यस्मिन्पुरे संकल्पभूभृता । क्रीडार्थमात्मनश्चित्रा देहापवरकाः कृताः ॥ १५ ॥ केचिद्गीर्वाणनामान ऊर्ध्व एव नियोजिताः । नरनागादयः केचिदध एव नियोजिताः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त इसी त्रिजगद्रूपी नगर में संकल्परूपी राजा ने अपनी क्रीड़ा के लिए भाँति-भाँति के देव, नर, तिर्यगादि के देहरूपी मध्यगृह बनाए हैं, कुछ देवनामवालों को ऊपर ही रक्खा है। नर, नाग आदि कुछ को नीचे ही रक्खा