Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यस्यारम्भसहस्राणि सुखदुःखप्रदान्यलम् ।
संख्यातुं केन शक्यन्ते कल्लोला जलधेरिव ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसके सुख-दुःखप्रद हजारों कार्यों को सागर की तरंगों की तरह कौन गिन सकता है ?