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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यः साहसैकरसिको नानाश्चर्यविहारवान् । केनचित्त्रिषु लोकेषु न महात्मा वशीकृतः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जो बड़े-बड़े साहसपूर्ण कार्य करने में एकमात्र रसिक है, विविध प्रकार के आश्चर्यमय स्थलों में विहार करता है, उस महात्मा को तीनों लोकों में किसी ने भी अपने वश में नहीं किया