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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

जयति गच्छति वल्गति जृम्भते स्फुरति भाति न भाति च भासुरः । सुत महामहिमा स महीपतिः पतिरपामिएव वातरयाकुलः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे पुत्र, अन्तर्गत आत्मज्योति से देदीप्यमान अतएव महामहिमाशाली वह राजा आँधी के झोंकों से अशान्त सागर के समान शत्रुओं का तिरस्कार करने की सामर्थ्य रहते शत्रुओं की ओर चलता है, विजय प्राप्त करता है, शब्द करता है, सम्पत्तियों को प्राप्तकर वृद्धि को प्राप्त होता है, दमकता है, स्वप्न ओर जाग्रत में प्रतीत होता है एवं सुषुप्ति, प्रलय, समाधि ओर मुक्ति में प्रतीत नहीं होता हे