Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अथापृच्छत्सुतस्तत्र जम्बूद्वीपे महानिशि । कदम्बाग्रावचूडस्थं पितरं पावनाशयम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, वहाँ जम्बूद्रीप में अर्धरात्र के समय कदम्ब वृक्ष की चोटी पर कदम्ब के शिरोभूषण की तरह बैठे हुए पवित्र अन्तःकरणवाले पिता से पुत्र ने पूछा

सर्ग सन्दर्भ

बावनवाँ सर्ग समाप्त तिरपनवाँ सर्ग जगत संकल्प से कल्पित है, इस अर्थ में दृष्टान्तभूत खोत्थ राजा के उपाख्यान के तात्पर्य का विस्तारपूर्वक वर्णन ।