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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्नेवातिविपुले पत्तने तेन भूभृता । संसारिणो विरचिता मुग्धापवरका गणाः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

उसी अतिविशाल नगर में उक्त राजा ने विषयों के मोह में फँसे हुए, अपवरक (मध्यगृह) के समान आकाश के परिच्छेदक होने के कारण अपवरकरूप संसारी देवता, मनुष्य आदि देह समूहों की सृष्टि की