Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
एवं वदन्तीं स मुनिः सच्छिष्यमबले सुतम् ।
इहैव स्थापयैनं त्वमित्युक्त्वा तां व्यसर्जयत् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कह रही उससे, हे अबले, उत्तम शिष्य के गुणों से सम्पन्न इस पुत्र को तुम यहीं रहने दो ।” -
ऐसा कहकर मुनि ने उसे बिदा कर दिया