Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
तस्यां गतायां स पितुरन्तेवासितया तया ।
अतिष्ठत्संयतो धीमानर्कस्येवारुणः पुरः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
उसके चले जाने पर गुरुसेवारूप व्रत से स्थिर नियमवाला
वह बुद्धिमान् बालक जैसे सूर्य के सामने अरुण रहता है वैसे ही अपने पिता के आगे स्थित रहा