Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verses 27–28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verses 27–28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 27,28
संस्कृत श्लोक
प्रभो केवलमेतेन ज्ञानं नाधिगतं शुभम् ।
येन संसारचक्रेऽस्मिन्न पुनः परिपीड्यते ॥ २७ ॥
ज्ञानं त्वमेवास्य विभो कृपयोपदिशाधुना ।
को हि नाम कुले जातं पुत्रं मौर्ख्येण योजयेत् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रभो,
केवल इसने मंगलमयी ब्रह्मविद्या, जिससे जीव इस संसारचक्र में फिर पीड़ित नहीं होते, प्राप्त नहीं
की । हे प्रभो, कृपा करके इस समय इसे ब्रह्मविद्या का उपदेश आप ही दीजिये । कौन ऐसा पुरुष होगा
जो अपने कुल में उत्पन्न हुए पुत्र को मूर्ख रक्खेगा । भाव यह है कि अन्य विद्याएँ ततत्वविषयिणी नहीं हे,
अतएव वे अविद्या ही हैं उनसे मूर्खता की निवृत्ति नहीं हो सकती हे