Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verses 25–26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verses 25–26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 25,26
संस्कृत श्लोक
सा प्रणम्योपविश्याग्रे मुनिमिन्दुसमाननम् ।
उवाच कलया वाचा चूतद्रुमभिवालिनी ॥ २५ ॥
अयं स भगवन्भव्यः कुमारः पुत्र आवयोः ।
कृतो मया समग्राणां कलानां किल कोविदः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे भँवरी आम के वृक्ष के समीप जाकर मधुर ध्वनि से बोलती है, वैसे ही चन्द्रमा के
समान मुखवाले मुनि को प्रणाम कर और उनके आगे बैठकर उसने मधुरवाणी से कहा : हे भगवन्, हम
दोनों का पुत्र यह सुन्दर कुमार है । इसको मैंने सब कलाओं में दक्ष कर दिया है