Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verses 23–24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 23,24
संस्कृत श्लोक
सा जगामात्मसदनं सोऽतिष्ठत्स्वात्मना सह ।
अवहत्क्रमशः काल ऋतुसंवत्सराङ्कितः ॥ २३ ॥
अथ दीर्घेण कालेन सैवोत्पलविलोचना ।
द्वादशाब्दमुपादाय सुतं मुनिमुपाययौ ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
वह तो अपने घर
चली गई और मुनि अकेले वहाँ रह गये । ऋतु, वर्ष आदि के क्रम से काल बीतने लगा । दीर्घं समय के
अनन्तर वही कमल के तुल्य नेत्रवाली वनदेवी बारह वर्ष के पुत्र को लेकर मुनि के समीप उपस्थित
हुई