Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वा स मुनिस्तन्वीं प्रसन्नमुखमण्डलाम् ।
परिचर्यां करोमीति प्रार्थनोत्कां व्यसर्जयत् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कह कर उस मुनि ने वरदान पाने से प्रसन्न मुखमण्डलवाली उस सुन्दरी को, जो मैं आपकी
सेवा करूँ, इस प्रकार की प्रार्थना करने के लिए उत्कण्ठित थी, विदा किया