Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तले निषण्णनागेन्द्रं व्योम्नि तारागणाकुलम् ।
लतापुष्पमयं मध्ये खमण्डलमिवापरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके तलप्रदेश मेँ गजराज बैठे रहते थे, आकाश में वह तारागणों
से युक्त था तथा मध्यप्रदेश में लता-पुष्पमय था, अतएव जिसके तलप्रदेश (पाताल) में शेष आदि
नागराज निवास करते हैं, ऊपर तारागण रहते हैं और जिसके मध्य में लता-पुष्पमयी पृथ्वी विद्यमान
है, ऐसे दूसरे आकाशमण्डल के समान वह था