Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
पितामहमिवाशेषशैलकाननशालिनम् ।
फलपल्लवपुष्पाणां कोशमेकमिवावनौ ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
कदम्बवृक्ष अपने द्वारा रचे गये सब प्राणियों, पर्वतो ओर वनों से शोभित हो रहे ब्रह्माजी के तुल्य था,
पृथ्वी मे फल, पल्लव ओर फूलों का वह एकमात्र निधान-सा था