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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

सहस्रभुजशाखाख्यं पूरिताकाशकोटरम् । विश्वरूपमिवोन्नृत्तं चन्द्रार्ककृतकुण्डलम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

वह हजारों भुजाओंरूपी शाखाओं से युक्त था ओर उसने आकाश ओर पृथिवी के मध्यभाग को भर दिया था, अतएव वह उद्धत नृत्यवाले, चन्द्रमा ओर सूर्यरूपी कुण्डलो को धारण करनेवाले विश्वरूप भगवान के तुल्य था