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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

सेन्द्रचापविलासेन कुमुदोत्कररेणुना । मञ्जरीपिञ्जराश्यामं विद्युत्वन्तमिवाम्बुदम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

इन्द्रधनुष की सुन्दरतावाले कुमुद, नीलकमल, रक्तकमल आदि के तुल्य भाँति-भाँति के फूलों के परागों से युक्त, मंजरियों से पीला और पत्तों से चारों ओर हरा वह वृक्ष बिजलीवाले मेच के समान दिखाई देता था