Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verses 79–81
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verses 79–81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 79
संस्कृत श्लोक
पुनः कालं कृतापूतं कलुषीकुरुते कलिः ।
सचक्रिणमिवाम्भोधिं प्रवृद्धोऽवकरानिलः ॥ ७९ ॥
पुन कालकुलालेन कृतभूतशरावकम् ।
चक्रमावर्त्यते वेगादजस्रं कल्पनामकम् ॥ ८० ॥
पुनर्नीरसतामेति जगदस्तशुभस्थिति ।
अभ्यासीभूतसंकल्पं संशुष्कमिव काननम् ॥ ८१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रलयकाल का
वायु अपने भीतर सो रहे भगवान विष्णु के साथ समुद्र को कलुषित कर देता है वैसे ही सत्ययुग से पवित्र
काल को कलि (अधर्म) पुनः दूषित करता है