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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 78

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 78 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 78

संस्कृत श्लोक

पुनरिन्द्रादिके याते सज्जमास्थाय केवलम् । आयात्यपरदेवेन्द्रषट्पदः स्वर्गपङ्कजम् ॥ ७८ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्व इन्द्ररूप भ्रमर के अपने अधिकार से निवृत्त होने पर नवीन, तत्‌ तत्‌ मन्वन्तर के अधिकारी अन्यान्य देवताओं से सन्नद्ध ऐरावत में बैठकर अपर देवेन्द्ररूपी भ्रमर पूर्व प्रदेशों से रहित स्वर्गरूपी कमल में पुनः प्राप्त होता है