Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 77
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 77 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 77
संस्कृत श्लोक
पुनः कार्यक्रियापक्षैः संसारारम्भनामकम् ।
किंचित्पटपटं कृत्वा याति कालकपिञ्जलः ॥ ७७ ॥
हिन्दी अर्थ
सृष्टिकालरूपी कपिंजल (पक्षी) क्रियारूपी पंखों से संसार निर्माणनामक
कुछ घटपटरूप कार्य करके फिर चला जाता है