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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 54

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

पुनर्मन्वन्तरारम्भाः पुनः कल्पपरम्पराः । पुनः पुनः कार्यदशाः प्रातः प्रातरहो यथा ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

फिर मन्वन्तरों के आरम्भ होते हैं, इस पर एक कल्प के बाद अनेकानेक कल्पों की परम्पराएँ फिर-फिर कार्यावस्‍्थाएँ ऐसे होती है, जैसे हर रोज प्रातःकाल के बाद दिन होते हैँ