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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 53

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

पुनः कृतं पुनस्त्रेता पुनः स द्वापरः कलिः । पुनरावर्तते सर्वं चक्रावर्ततया जगत् ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

फिर कृत युग, फिर त्रेता, फिर द्वापर, फिर कलि इस प्रकार सारा जगत चक्र के भ्रमण की तरह पुनः-पुनः आता है