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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

विगतेच्छा यथाप्राप्तव्यवहारानुवर्तिनः । विचरन्ति समुन्नद्धाः स्वस्था देहरथे स्थिताः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

बैठे हुए, आत्मनिष्ठ हो 'विज्ञानसारथिर्यस्तु मनः प्रग्रहवान्नरः“ (विज्ञानरूपी सारथिवाला, मनरूपी लगामवाला मनुष्य) इत्यादि श्रुति में कहे गये साधनों से सन्नद्ध हो घूमते हैं