Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
त्वमपि प्राप्तवान् राम विवेकमिममाततम् ।
प्रज्ञाबलेन चानेन ज्ञाने स्वस्थोऽसि सुन्दर ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
मुझमें वे गुण हैं या नहीं, इस प्रकार संदेह मे पडे हुए श्रीरामचन्द्रजी को ढाढ़स देते है ।
हे सुन्दर श्रीरामचन्द्रजी, आप भी इस विशाल विवेक को प्राप्त हो चुके हैं, इस प्रज्ञा के बल से ज्ञान
में आप स्वस्थ हैं