Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यदा ते नेन्द्रियार्थश्रीः स्वदते हृदि राघव ।
तदा विज्ञातविज्ञानः समुत्तीर्णभवार्णवः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रामचन्द्रजी, जब आपके हृदय में इन्द्रियार्थ सम्पत्तियाँ स्वादु
नहीं लगेगी, तब आप ज्ञातज्ञेय और संसार सागर से उत्तीर्ण हो जायेंगे