Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
ममेदमित्यसद्भूतमिन्द्रियार्थे भवन्मनः ।
मा निमज्जत्वमग्नः सन्मा करोतु करोतु वा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
डइन्द्रियार्थों में ममता त्यागरूप गुण का उपदेश देते हुए उसमें अनास्था का उपपादन करते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, इन्द्रियार्थों में असत्यभूत यह मेरा है, यों आपका मन निमग्न न हो, मग्न न होकर
चाहे वह कर्म न करे चाहे करे