Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यस्य नेच्छा न वानिच्छा ज्ञस्य कर्मणि तिष्ठतः ।
न तस्य लिप्यते प्रज्ञा पद्मपत्रमिवाम्बुभिः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
कर्म कर रहे जिस
ज्ञानी की कर्म में न तो इच्छा है और न अनिच्छा है उसकी बुद्धि जल से कमल के पत्ते के समान स्पर्श को
प्राप्त नहीं होती