Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अत्यन्तविरतः स्वस्थः सर्ववासविवर्जितः ।
व्योमवत्तिष्ठ नीरागो राम कार्यपरोऽपि सन् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
श्रीरामचन्द्रजी, अत्यन्त वैराम्ययुक्त, आत्मनिष्ठ, सब प्रकार के निवासों से रहित आप अपने कार्य में
तत्पर होकर भी रागरहित होकर आकाश के समान असंग होकर स्थित होइये