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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verses 30–31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verses 30–31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 30,31

संस्कृत श्लोक

नयत्युपचयं देहं स्वस्वभावमृतुर्यथा । कालेन स्फुटतामेति भवत्यमलविग्रहः ॥ ३० ॥ बुद्धिसत्त्वबलोत्साहविज्ञानैश्वर्यसंस्थितः । स एव भगवान्ब्रह्मा सर्वलोकपितामहः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

समय पाकर वह प्रकट होता है। निर्मल शरीरवाला पिघले हुए सुवर्ण के तुल्य तथा परम ब्रह्मा से उत्पन्न हुआ सब लोगों का पितामह वही भगवान ब्रह्मा बुद्धि, सत्त्वगुण, बल, उत्साह, विज्ञान ओर ऐश्वर्य से सम्पन्न होता है