Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
प्राकाश्यममलालोकमालोकस्तेन वर्धते ।
मनस्तावद्गुणगतं रसतन्मात्रवेदनम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश, वायु ओर तेज से वृद्धि को प्राप्त हुआ मन रसतन्मात्ररूप जल की शीतता को क्षणमात्र में
प्राप्त करके जलनाम से प्रतीति योग्य होता है