Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
क्षणार्धेन त्वपां शैत्यं जलसंवित्ततो भवेत् ।
ततस्तादृग्गुणगतं मनो भावयति क्षणात् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर पूर्वोक्त चारों के संघात को प्राप्त हुआ
मन क्षणभर में गन्धयुक्त स्थूल स्वरूप की भावना करता है, जिससे पृथ्वी उत्पन्न होती है