Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
शब्दस्पर्शस्वरूपाभ्यां संघाताज्जन्यतेऽनलः ।
मनस्तद्धनतां प्राप्य ततो भावयति क्षणात् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उनसे घनता को प्राप्त हुआ मन निर्मल
आलोकवाली प्रकाशता की क्षण भर मेँ भावना करता है, उससे आलोक की अभिवृद्धि होती है