Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verses 31–32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verses 31–32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
अयमन्योऽयमन्योऽयं भाग इत्यम्बरात्मनि ।
मिथ्याज्ञानविकल्पोक्तिर्वाचि सत्यार्थतात्र का ॥ ३१ ॥
वह्नेः शिखेव जातेयं शिखेति मनसोऽभिधा ।
चापलोत्थविकल्पश्रीर्वस्तुतः स्यान्न सिद्ध्यति ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्माकाश में यह भिन्न हे, यह भिन्न हे, यह विभाग
मिथ्याज्ञान के विकल्प से कथनमात्र हे । इस कथन में क्या सत्यार्थता हे ?